Life Processes Rapid Revision Notes | Bihar Board Class 10

Life Processes – Rapid Revision Notes

Bihar Board | Class 10 Science (Biology)
Life Processes Rapid Revision Notes

1. जैव प्रकरण (Life Processes) – मूल अवधारणा

परिभाषा: जीवित प्राणियों में निरंतर चलने वाली वे क्रियाएँ जो जीवन को बनाए रखती हैं, उन्हें Life Processes कहते हैं।

मुख्य चार जैव प्रक्रम:
  • पोषण (Nutrition)
  • श्वसन (Respiration)
  • परिवहन (Transportation)
  • उत्सर्जन (Excretion)

जीवित प्राणियों की विशेषताएँ: वृद्धि, पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, गति, प्रजनन एवं पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रिया।

2. पोषण (Nutrition)

परिभाषा: भोजन को ग्रहण कर ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को पोषण कहते हैं।

पोषण के प्रकार

1. स्वपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition):

  • पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
6CO₂ + 6H₂O + सूर्य का प्रकाश → C₆H₁₂O₆ + 6O₂

2. परपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition):

  • मनुष्य एवं जानवर दूसरों पर निर्भर होते हैं।
  • प्रकार: शाकाहारी, मांसाहारी, सर्वाहारी, परजीवी, सहजीवी

मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)

मुँह → ग्रासनली → पेट → छोटी आंत → बड़ी आंत → मलाशय → गुदा

  • मुँह: दाँत भोजन को तोड़ते हैं, लार एमाइलेज स्टार्च का पाचन करता है
  • पेट: प्रोटीन का पाचन, HCl जीवाणुओं को मारता है
  • छोटी आंत: पूर्ण पाचन एवं पोषक तत्वों का अवशोषण
  • बड़ी आंत: जल का अवशोषण

मुँह (Mouth)

  • रासायनिक पाचन: लार में उपस्थित एमाइलेज एंजाइम स्टार्च को चीनी में बदलता है
  • पाचन की शुरुआत यहीं से होती है

ग्रासनली (Oesophagus)

  • भोजन को मुँह से पेट तक पहुँचाती है
  • पेरिस्टालसिस (मांसपेशीय संकुचन) से भोजन नीचे की ओर बढ़ता है

पेट (Stomach)

  • HCl (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल):
    • कीटाणुओं को नष्ट करता है
    • भोजन को नरम करता है
    • पेप्सिन एंजाइम को सक्रिय करता है
  • पेप्सिन: प्रोटीन को छोटे अणुओं में तोड़ता है
  • बलगम (Mucus): पेट की दीवारों को HCl से बचाता है
  • 2–3 घंटे में भोजन चाइम (Chyme) में बदल जाता है

छोटी आंत (Small Intestine)

  • यहाँ अधिकतम पाचन एवं अवशोषण होता है
  • पित्त रस (यकृत से): वसा का इमल्सीफिकेशन करता है
  • अग्न्याशयी रस: कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का पाचन करता है
  • पोषक तत्व आंत की दीवार से रक्त में अवशोषित होते हैं
  • लगभग 5–7 मीटर लंबी होती है

बड़ी आंत (Large Intestine)

  • अपचित भोजन के अवशेषों का संग्रह
  • जल का अवशोषण
  • मल का निर्माण

मलाशय और गुदा (Rectum & Anus)

  • मल को अस्थायी रूप से संग्रहीत करता है
  • गुदा द्वारा मल को शरीर से बाहर निकाला जाता है

3. श्वसन (Respiration)

परिभाषा: भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को श्वसन कहते हैं। यह कोशिका में ग्लूकोज का विघटन है।

श्वसन के प्रकार

1. उभयतापी श्वसन (Aerobic Respiration):

  • ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है
  • भोजन का पूर्ण विघटन होता है
  • अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है (38 ATP)
  • अंतिम उत्पाद: CO₂ + H₂O + ऊर्जा
C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा
  • उदाहरण: आराम की स्थिति में, हल्का कार्य करते समय

2. अनुभवयतापी श्वसन (Anaerobic Respiration)

  • ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में भोजन का आंशिक विघटन
  • कम ऊर्जा प्राप्त होती है (2 ATP अणु)
  • अंतिम उत्पाद: लैक्टिक अम्ल या इथेनॉल + CO₂
  • मांसपेशियों में: लैक्टिक अम्ल बनता है, जिससे थकान महसूस होती है
  • खमीर/बैक्टीरिया में: इथेनॉल और CO₂ बनता है
  • उदाहरण: तेज व्यायाम, भारी शारीरिक श्रम, घना पेशीय कार्य

मानव श्वसन तंत्र (Human Respiratory System)

नाक → ग्रसनी → कंठनली → श्वासनली (Trachea) → ब्रॉन्काई → फेफड़े → अल्वियोली

श्वसन क्रिया की प्रक्रिया

प्रवेश (Inhalation)

  • पसलियाँ ऊपर और बाहर की ओर उठती हैं
  • डायाफ्राम नीचे की ओर खिंचता है
  • फेफड़े फैलते हैं
  • वायु दबाव कम हो जाता है
  • हवा फेफड़ों के अंदर प्रवेश करती है

निर्गमन (Exhalation)

  • पसलियाँ नीचे और अंदर की ओर आती हैं
  • डायाफ्राम ऊपर की ओर उठता है
  • फेफड़े सिकुड़ते हैं
  • वायु दबाव बढ़ता है
  • हवा बाहर निकल जाती है

अल्वियोली (Alveoli) का कार्य

  • फेफड़ों में लाखों छोटी वायु थैलियाँ होती हैं
  • दीवार अत्यंत पतली होती है (एक कोशिका मोटी)
  • रक्त केशिकाओं की समृद्ध आपूर्ति होती है
गैस विनिमय:
  • O₂ अल्वियोली से रक्त में प्रवेश करता है
  • CO₂ रक्त से अल्वियोली में आता है
  • CO₂ को श्वसन द्वारा बाहर निकाला जाता है

4. परिवहन (Transportation)

मानव में परिवहन: रक्त और हृदय के द्वारा पूरे शरीर में गैसों, पोषक तत्वों एवं अपशिष्टों का परिवहन होता है।

रक्त के घटक (Components of Blood)

RBC (Red Blood Cells)

  • इनमें हीमोग्लोबिन (Protein) पाया जाता है
  • ऑक्सीजन को शरीर के सभी भागों तक ले जाती हैं
  • O₂ से मिलकर रक्त को लाल रंग देती हैं

WBC (White Blood Cells)

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती हैं
  • बैक्टीरिया एवं विषाणुओं से शरीर की रक्षा करती हैं

प्लेटलेट्स (Platelets)

  • चोट लगने पर रक्त का थक्का बनाती हैं
  • अधिक रक्तस्राव को रोकती हैं

प्लाज्मा (Plasma)

  • रक्त का द्रव भाग
  • जिसमें सभी रक्त कोशिकाएँ तैरती हैं
  • पोषक तत्व, हार्मोन एवं अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है

हृदय की संरचना (Structure of Heart)

  • हृदय में कुल 4 कोष्ठ होते हैं
1. आलिंद (Atria) – ऊपरी भाग
  • दायाँ आलिंद: शरीर से ऑक्सीजन रहित रक्त प्राप्त करता है
  • बायाँ आलिंद: फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त प्राप्त करता है
2. निलय (Ventricles) – निचला भाग
  • दायाँ निलय: ऑक्सीजन रहित रक्त को फेफड़ों में भेजता है
  • बायाँ निलय: ऑक्सीजन युक्त रक्त को पूरे शरीर में भेजता है

द्विगुण परिसंचरण (Double Circulation)

1. फुफ्फुसीय परिसंचरण (Pulmonary Circulation)

दायाँ निलय → Pulmonary Artery → फेफड़े → Pulmonary Vein → बायाँ आलिंद

  • फेफड़ों में CO₂ निकलती है
  • रक्त में O₂ मिलती है

2. सिस्टेमिक परिसंचरण (Systemic Circulation)

बायाँ निलय → Aorta (महाधमनी) → पूरा शरीर → Superior/Inferior Vena Cava → दायाँ आलिंद

  • शरीर को O₂ प्रदान की जाती है
  • रक्त CO₂ ग्रहण करता है

धमनियाँ (Arteries) बनाम शिराएँ (Veins)

विशेषता धमनी (Artery) शिरा (Vein)
दिशा हृदय से दूर हृदय की ओर
दीवार मोटी और लचीली पतली और कमजोर
रक्त दबाव अधिक कम
ऑक्सीजन सामान्यतः O₂ युक्त सामान्यतः O₂ रहित
वाल्व नहीं हाँ (रक्त को वापस जाने से रोकते हैं)
स्थान गहराई में सतह के पास

अपवाद (Exceptions)

  • Pulmonary Artery: ऑक्सीजन रहित रक्त ले जाती है
  • Pulmonary Vein: ऑक्सीजन युक्त रक्त ले जाती है

पौधों में परिवहन (Transportation in Plants)

जाइलम (Xylem)

  • जड़ों से जल एवं खनिज लवण को पत्तियों तक पहुँचाता है
  • मृत कोशिकाओं से बनी खोखली नलियाँ
  • कपिलरी क्रिया और वाष्पोत्सर्जन खिंचाव से ऊपर उठता है

फ्लोएम (Phloem)

  • पत्तियों में बने भोजन को पूरे पौधे में वितरित करता है
  • जीवित कोशिकाओं से बना होता है
  • जल में घुलनशील भोजन (शर्करा) का परिवहन करता है

5. उत्सर्जन (Excretion)

परिभाषा: शरीर की चयापचय (metabolic) क्रियाओं से बने अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।

मुख्य अपशिष्ट पदार्थ

  • यूरिया (Urea): प्रोटीन के विघटन से
  • क्रिएटिनिन: मांसपेशियों के टूटने से
  • यूरिक अम्ल: न्यूक्लिक अम्ल के विघटन से
  • अतिरिक्त लवण एवं जल

मानव उत्सर्जन तंत्र (Human Excretory System)

वृक्क (Kidney) → मूत्रवाहिनी (Ureter) → मूत्राशय (Bladder) → मूत्रमार्ग (Urethra)

वृक्क (Kidney) के कार्य

  • सेम के बीज (Bean-shaped) के समान दो अंग
  • रक्त को शोधित करता है
  • मूत्र का निर्माण करता है
  • जल एवं लवण संतुलन बनाए रखता है

नेफ्रॉन (Nephron) – वृक्क की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई

ग्लोमेरुलस (Glomerulus)

  • रक्त केशिकाओं का गुच्छा
  • बोमैन कैप्सूल से घिरा होता है
  • यहाँ निस्पंदन (Filtration) होता है

बोमैन कैप्सूल (Bowman's Capsule)

  • ग्लोमेरुलस को घेरे रहता है
  • निस्पंदित द्रव (Filtrate) को एकत्र करता है

ट्यूबुल (Tubule)

  • यहाँ पुनरावशोषण (Reabsorption) होता है
  • उपयोगी पदार्थ जैसे ग्लूकोज, ऐमिनो एसिड, जल पुनः रक्त में चले जाते हैं
  • अपशिष्ट पदार्थ ट्यूबुल में शेष रहते हैं

नेफ्रॉन के तीन मुख्य कार्य

1. निस्पंदन (Filtration)
  • रक्त दबाव के कारण छोटे अणु छन जाते हैं
  • रक्त कोशिकाएँ एवं प्रोटीन रक्त में ही रह जाते हैं
2. पुनरावशोषण (Reabsorption)
  • उपयोगी पदार्थ वापस रक्त में चले जाते हैं
  • जैसे – ग्लूकोज, ऐमिनो एसिड, जल, लवण
3. स्राव (Secretion)
  • अतिरिक्त आयन एवं विषैले पदार्थ ट्यूबुल में डाले जाते हैं

मूत्रवाहिनी (Ureter)

  • मूत्र को वृक्क से मूत्राशय तक ले जाती है

मूत्राशय (Bladder)

  • मूत्र को अस्थायी रूप से संग्रहित करता है
  • क्षमता लगभग 500–1000 mL

मूत्रमार्ग (Urethra)

  • मूत्र को शरीर से बाहर निकालता है

पौधों में अपशिष्ट निष्कासन (Excretion in Plants)

विधियाँ

  • पुरानी पत्तियों का गिरना: अपशिष्ट पत्तियों में जमा होकर बाहर निकलता है
  • रेजिन एवं गम का स्राव: तनों के माध्यम से
  • वाष्पीकरण: CO₂ एवं O₂ गैसों का निष्कासन
  • ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलेशन: ऊर्जा उत्पादन के दौरान अपशिष्ट बनते हैं

6. परीक्षा के लिए सुपर क्विक रिवीजन (5 मिनट)

जरूर याद रखें:
  • जैव प्रक्रम – 4 (पोषण, श्वसन, परिवहन, उत्सर्जन)
  • पाचन का क्रम – 7 भाग
  • पेट के कार्य – HCl, पेप्सिन, बलगम
  • श्वसन – Aerobic vs Anaerobic (1 उदाहरण)
  • रक्त के घटक – 4 + 1-1 कार्य
  • धमनी बनाम शिरा – 3 अंतर
  • हृदय – 4 कोष्ठ (दायाँ = O₂ रहित, बायाँ = O₂ युक्त)
  • उत्सर्जन क्रम – वृक्क → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग
  • नेफ्रॉन – 3 भाग + 3 कार्य

7. महत्वपूर्ण डायग्राम प्रैक्टिस (5 मिनट)

  • हृदय – 4 कोष्ठ + प्रमुख धमनियाँ/शिराएँ
  • नेफ्रॉन – ग्लोमेरुलस, बोमैन कैप्सूल, ट्यूबुल
  • मानव पाचन तंत्र – 7 भाग
  • मानव श्वसन तंत्र – नाक से अल्वियोली तक
  • रक्त परिसंचरण – हृदय ↔ फेफड़े ↔ शरीर
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