कक्षा 10 विज्ञान – प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of light) | Complete Notes in Hindi
परिचय
प्रकाश का अपवर्तन भौतिकी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, जिसे हम रोज़मर्रा की जिंदगी में अनुभव करते हैं। जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है, तो उसकी दिशा बदल जाती है। इसी घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
यदि आपने कभी पानी में डूबी पेंसिल को टेढ़ा देखा हो या काँच के पीछे रखी वस्तु को उठा हुआ महसूस किया हो, तो आपने अपवर्तन का प्रभाव देखा है। इस लेख में हम अपवर्तन के नियम, अपवर्तनांक, पूर्ण आंतरिक परावर्तन तथा उत्तल-अवतल लेंस को सरल और स्पष्ट भाषा में समझेंगे।
प्रकाश का अपवर्तन क्या है?
जब प्रकाश की किरण एक माध्यम (जैसे हवा) से दूसरे माध्यम (जैसे पानी या काँच) में जाती है, तो उसकी चाल (speed of light in medium) बदल जाती है। चाल में परिवर्तन के कारण किरण मुड़ जाती है।
मुख्य कारण:
- विभिन्न माध्यमो में प्रकाश की चाल भिन्न-भिन्न होती हैं।
- प्रकाश की चाल :-
- (a) हवा में - $3 \times 10^{8} \text{ m/s}$
- (b) पानी में - $2.25 \times 10^{8} \text{ m/s}$
- (c) काँच में - $2 \times 10^{8} \text{ m/s}$
- प्रकाश के वेग में भिन्नता ही प्रकाश के अपवर्तन के मुख्य कारण हैं।
जैसे: हवा, पानी की अपेक्षा विरल माध्यम तथा पानी, हवा की अपेक्षा सघन माध्यम हैं।
अपवर्तन के नियम (Law of Refraction)
प्रकाश के अपवर्तन के दो नियम हैं:
- आपतित किरण, अपवर्तित किरण और आपतन बिन्दु पर डाला गया अभिलम्ब तीनों एक ही समतल में होते हैं।
- प्रकाश के किसी विशेष रंग के लिए आपतन कोण की ज्या (sine) तथा अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात किन्ही दो माध्यमों के लिए एक नियतांक होता है। इसे स्नेल का नियम भी कहते हैं।
अर्थात :-
$$\frac{\sin(i)}{\sin(r)} = \text{नियतांक}$$या
$$\frac{\sin i}{\sin r} = \mu$$अपवर्तनांक (Refractive Index)
किन्ही दो माध्यमों के लिए आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात नियतांक होता है। जिसे अपवर्तनांक कहते हैं। इसे $\mu$ (म्यू) या n से सूचित किया जाता है।
अपवर्तनांक को दो प्रकार से व्यक्त किया जाता हैं:
1. निरपेक्ष अपवर्तनांक (Absolute Refractive index)
हवा में प्रकाश की चाल तथा उस माध्यम में प्रकाश की चाल के अनुपात को उस माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक कहते है।
अर्थात, निरपेक्ष अपवर्तनांक =
$$\frac{\text{हवा में प्रकाश की चाल}}{\text{उस माध्यम में प्रकाश की चाल}}$$ $$\Rightarrow n = \frac{c}{V_m}$$2. सापेक्ष अपवर्तनांक (Relative Refractive index)
दो माध्यमो के निरपेक्ष अपवर्तनांकों के अनुपात को सापेक्ष अपवर्तनांक कहते है। माध्यम 1 के सापेक्ष माध्यम 2 के अपवर्तनांक को $^1n_2$ या $n_{21}$ से सूचित किया जाता है।
जहाँ :- $v_1 =$ माध्यम 1 में प्रकाश की चाल, $v_2 =$ माध्यम 2 में प्रकाश की चाल
- अपवर्तनांक दो सामान्य राशियों का अनुपात हैं। इसलिए इसका कोई मात्रक नहीं होता हैं। यह एक शुद्ध संख्या हैं।
- किसी पदार्थ का अपवर्तनांक आपतन कोण के मान पर निर्भर नहीं करता हैं बल्कि पदार्थ की प्रकृति और प्रकाश के रंग पर निर्भर करता हैं।
- अपवर्तनांक को गहराई के संदर्भ में निम्न रूप में परिभाषित किया जाता है:
पार्श्विक विस्थापन (Lateral Displacement)
काँच स्लैब से निकलने वाली निर्गत किरण (Emergent Ray) तथा आपतित किरण (Incident Ray) के मूल पथ के बीच लाम्बिक दुरी को पार्श्विक विस्थापन कहते हैं। इसे प्रायः d से सूचित किया जाता हैं।
प्रकाश के अपवर्तन का प्रभाव (Effects of Refraction of Light)
- पानी में डूबी पेंसिल या छड़ी का मुड़ा हुआ एवं छोटा प्रतीत होना।
- अक्षरों के ऊपर काँच का स्लैब रखकर देखने पर उसका उठा हुआ प्रतीत होना।
- मछुआरे को मछली भेदने में कठिनाई होना।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection)
जब किसी किरण को क्रांतिक कोण से भी अधिक कोण पर आपत्तित कराया जाय तो वह अपवर्तन के फलस्वरूप उसी माध्यम में लौट जाती है, उसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहा जाता है।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन की दो शर्तें हैं:
- प्रकाश सघन से विरल में जाए।
- आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से बड़ा हो।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर आधारित घटनाएँ:
- हीरा का चमकना
- जल में बुलबुले का चमकना
- मरीचिका
- प्रकाशिक तंतु (Optical Fiber)
- गर्मी में सड़क पर जल का दिखना
- जब प्रकाश की किरण सघनन माध्यम से विरल माध्यम में जाएगी तभी पूर्ण आंतरिक परावर्तन हो सकता हैं।
- मृग मरीचिका के बनने में अपवर्तन सहायक कारक है, जबकि पूर्ण आंतरिक परावर्तन मुख्य कारक है।
कुछ द्रव्यों का अपवर्तनांक
| क्रम | द्रव्यात्मक माध्यम | अपवर्तनांक |
|---|---|---|
| 1 | निर्वात | 1.00 |
| 2 | हवा | 1.0003 |
| 3 | बर्फ | 1.31 |
| 4 | पानी | 1.33 |
| 5 | एल्कोहल | 1.36 |
| 6 | किरोसिन | 1.44 |
| 7 | बेंजीन | 1.50 |
| 8 | क्राउन काँच | 1.52 |
| 9 | कार्बनडाईसल्फाइड | 1.63 |
| 10 | हीरा | 2.42 |
लेंस (Lens)
दो निश्चित सतहों से घिरे किसी पारदर्शी पदार्थ का एक टुकड़ा, जिसका कम से कम एक सतह वक्रित हो, उसे लेंस कहते हैं।
लेंस दो प्रकार के होते हैं:
1. उत्तल लेंस (Convex Lens)
जो लेंस बीच में मोटा और किनारे पर पत्तला होता है, उसे उत्तल लेंस कहते हैं। उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस भी कहते हैं।
2. अवतल लेंस (Concave Lens)
जो लेंस बीच में पत्तला और किनारे पर मोटा होता है, उसे अवतल लेंस कहते हैं। अवतल लेंस को अपसारी लेंस भी कहते हैं।
लेंस से संबंधित कुछ परिभाषाएँ:
- लेंस में दो वक्रता केन्द्र होतें हैं तथा वक्रता त्रिज्या भी दो होती है।
- दोनों वक्रता त्रिज्याएँ आपस में समान हों, यह कोई आवश्यक नहीं हैं।
- लेंस के दो फोकस होते है।
- उत्तल लेंस का फोकस वास्तविक होता है।
- अवतल लेंस का फोकस काल्पनिक होता है।
- निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर हो जाती हैं।
- लेंस की सभी दूरियाँ प्रकाशीय केन्द्र से मापी जाती हैं।
लेंस सूत्र (Lens Formula)
उत्तल लेंस में सिद्ध करें कि:
अवतल लेंस में सिद्ध करें:
लेंस की क्षमता (Power of Lens)
फोकस दूरी के व्युत्क्रम को लेंस की क्षमता कहते हैं। इसे P से सूचित किया जाता है।
लेंस की क्षमता का S.I मात्रक डाइऑप्टर (Dioptres) होता है। इसे D से सूचित किया जाता है।
लेंसों की संयोजन की क्षमता (Power of combination of lenses):
जब अनेक पतले लेंसों को एक दूसरे के संपर्क में रखा जाता है, तो संयोजन की क्षमता उन लेंसों के अलग-अलग क्षमताओं के बीजीय योग के बराबर होता है।
यदि लेंसों की क्षमताएँ $P_1, P_2, P_3...P_n$ हो और उन्हें परस्पर संपर्क में रखा जाए तो उस संयोजन की क्षमता –
महत्वपूर्ण प्रश्न
1. बिना छुए हुए लेंसों तथा काँच के प्लेटो को कैसे पहचानेंगें?
उत्तल लेंस, अवतल लेंस एवं काँच के प्लेट को सामने बारी-बारी से एक पुस्तक को लाते है और छपे अक्षरों को देखते हैं।
- यदि छपे अक्षर अपने वास्तविक आकार से बड़ा दिखाई देता है तो यह उत्तल लेंस होता है।
- यदि छपे अक्षर अपने वास्तविक आकर से छोटा दिखाई देता है तो यह अवतल लेंस होता हैं।
- यदि छपे अक्षर अपने वास्तविक आकार के बराबर दिखाई देता है तो यह काँच के प्लेट होता हैं।
2. स्पर्श करके उत्तल, अवत्तल लेंस एवं काँच की प्लेट को कैसे पहचानेंगें?
किसी मेंज पर रखे उत्तल लेंस, अवतल लेंस तथा काँच की प्लेट को बारी बारी से स्पर्श करते हैं।
- यदि लेंस का दोनों अपवर्तक सतह उभरा (उठा) हुआ होता है तो वह उत्तल लेंस होता हैं।
- यदि लेंस का दोनों अपवर्त्तक सतह धँसा हुआ होता है तो वह अवतल लेंस होता हैं।
- यदि लेंस का दोनों अपवर्त्तक सतह समतल होता है तो वह काँच का प्लेट होता है।
3. उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस क्यों कहते हैं?
उत्तल लेंस में दो फोकस होता है। दोनों फोकस लेंस के दोनों ओर प्रकाशीय केन्द्र से समान दूरी पर रहती हैं। यह प्रकाशीय केन्द्र समांतर आपतित किरण को फोकस पर अभिसरित करती हैं, इसलिए उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस कहते हैं।
Note: उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक होती है।
4. अवतल लेंस को अपसारी लेंस क्यों कहते हैं?
अवतल लेंस में भी दो फोकस होते हैं। अवतल लेंस में प्रकाश की निर्गत किरणे बाहर की ओर फैलती है अर्थात् फोकस से अपसरित होती हुई मालूम पड़ती है, इसलिए अवतल लेंस को अपसारी लेंस कहते हैं।
Note: अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है।
5. हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय हैं?
हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है जो काफी अधिक है, इसलिए हीरा प्रकाशतः सघन माध्यम हैं। अतः हीरा में प्रकाश का वेग बहुत ही कम होता हैं।
6. पानी में डूबी हुई लकड़ी मुड़ी हुई प्रतीत होती हैं, क्यों?
जब पानी में लकड़ी का सीधा टुकड़ा डुबाया जाता है तब प्रकाश के अपवर्तन के कारण वह मुड़ी हुई प्रतीत होती हैं। जैसे ही प्रकाश की किरणें सघन माध्यम से विरल माध्यम में आती हैं वे लम्ब से परे (दूर) मुड़ जाती हैं जिस कारण लकड़ी का टुकड़ा मुड़ा हुआ प्रतीत होता है।
7. किसी उत्तल लेंस द्वारा जब सूर्य की किरणों को किसी कागज पर फोकसित करते हैं तो वह जल उठता है, क्यों?
सूर्य के प्रकाश के साथ-साथ ऊष्मीय उर्जा भी आती है। अतः जब उत्तल लेंस द्वारा हम सूर्य से आती किरणों को कागज पर फोकसित करते हैं, तो प्रकाश के साथ ऊष्मा भी कागज के छोटे से हिस्से पर फोकसित होती है, जिससे कागज का वह हिस्सा जल उठता है।
उत्तल लेंस तथा अवतल लेंस में अंतर
| उत्तल लेंस | अवतल लेंस |
|---|---|
| यह किनारे पर पतला तथा बीच में मोटा होता हैं | यह किनारे पर मोटा तथा बीच में पतला होता हैं |
| इसका फोकस वास्तविक होता हैं | इसका फोकस काल्पनिक होता हैं |
| यह प्रकाश को अभिसरित करता हैं | यह प्रकाश को अपसरित करता हैं |
| इसे अभिसारी लेंस कहते हैं | इसे अपसारी लेंस कहते हैं |
| इसमें वास्तविक तथा काल्पनिक दोनों प्रकार के प्रतिबिम्ब बनते हैं | इसमें केवल काल्पनिक प्रतिबिम्ब बनता हैं |
| इसकी क्षमता धनात्मक होती हैं | इसकी क्षमता ऋणात्मक होती हैं |
स्मरणीय तथ्य (Points to Remember)
- अपवर्त्तन के लिए दो माध्यमों की आवश्यकता होती है तथा दोनों माध्यमों का अपवर्त्तनांक अलग-अलग होनी चाहिए।
- जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती है, तो उसकी तरंगदैर्ध्य तथा वेग बदल जाती है, परन्तु उसकी आवृत्ति नहीं बदलती है।
- अपवर्त्तनांक की सहायता से किसी माध्यम की सघनता एवं विरलता का पता चलता है।
- अपवर्त्तनांक अधिक होने पर माध्यम सघन तथा अपवर्त्तनांक कम होने पर माध्यम विरल होता है।
- सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य को दीर्घवृत्ताकार दिखने के मुख्य कारण अपवर्तन है।
- प्रकाशिक तंतु (Optical Fiber) का प्रयोग सूचना प्रौद्योगिकी संचार के लिए किया जाता है।
- प्रकाशिक तंतु का खोज नरेन सिंह कपानी ने किया था।
- पानी के अंदर बना हवा का बुलबुला पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण ही सफेद एवं चमकीला प्रतीत होता है।
- छोटा लेंस प्रिज्म के भांति कार्य करता है।
- ओस की बूँदें उत्तल लेंस की भांति कार्य करती है।
- पानी का बुलबुला उत्तल लेंस की भांति दिखता है, परंतु अवत्तल लेंस के भांति कार्य करता है।
- प्रज्वलक के लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है।
- मोटे लेंस की क्षमता अधिक होती है।
- पतले लेंस की क्षमता कम होती है।
- धूप वाला चश्मा की क्षमता शून्य होता है, जबकि फोकस दूरी अनंत होती है।
- काँच स्लैब (Glass Slab) की फोकस अनंत तथा क्षमता शून्य होती है।